70 लोगों के कथित धर्मांतरण मामले में गिरोह के सरगना को हाईकोर्ट से जमानत, तमिलनाडु कनेक्शन आया सामने

70 लोगों के कथित धर्मांतरण मामले में गिरोह के सरगना को हाईकोर्ट से जमानत, तमिलनाडु कनेक्शन आया सामने

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कथित अवैध धर्मांतरण से जुड़े एक मामले में तमिलनाडु निवासी देव साहयम डैनियल राज को जमानत प्रदान कर दी है। पुलिस के अनुसार डैनियल धर्मांतरण कराने वाले गिरोह का मुख्य सरगना बताया गया है, जिस पर अब तक करीब 70 लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है।

पुलिस का दावा है कि आरोपी को सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था और जांच के दौरान यह सामने आया कि गिरोह की योजना लगभग 500 लोगों का धर्मांतरण कराने की थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपों की प्रकृति, सजा की गंभीरता, उपलब्ध सहायक साक्ष्य और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावनाओं पर विचार करते हुए जमानत का आदेश पारित किया।

डैनियल और उसका सह-आरोपी पारस 30 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। दोनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह गरीब, कमजोर और आदिवासी समुदाय के लोगों को उपचार और प्रार्थना सभाओं में बुलाकर उन्हें आर्थिक सहायता का लालच देता था और बाद में ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करता था। पूछताछ में डैनियल ने कथित तौर पर बताया था कि उसे तमिलनाडु स्थित ‘इंडियन मिशनरीज सोसाइटी’ द्वारा फील्ड प्रभारी नियुक्त किया गया था और वह जुलाई 2025 से इस क्षेत्र में सक्रिय था।

आरोपी के अनुसार, उसके अधीन आठ मिशनरियां काम कर रही थीं, जिन्हें सोसाइटी की ओर से वेतन, भत्ते और प्रचार-प्रसार के लिए धन उपलब्ध कराया जाता था। ये मिशनरियां गांवों में जाकर महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता देने के बहाने चर्च की गतिविधियों से जोड़ती थीं और धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन कराती थीं।

वहीं, डैनियल के अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने वाला व्यक्ति न तो पीड़ित है और न ही पीड़ित का कोई परिजन, ऐसे में यह मामला टिकाऊ नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी के पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है।

अदालत ने 28 जनवरी को पारित आदेश में कहा कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को जमानत दी जाती है।